अब गाय का शुद्ध दूध भी बना रहा ज़हर

सदियों से, भारत में गाय को माता की तरह पूजा जाता है। गाय का दूध, गोबर और मूत्र आयुर्वेद में विभिन्न बीमारियों के उपचार में भी सहायक सिद्ध होते हैं । जैसे पेट का कैंसर अगर शुरुआती दौर में हो तो गाय के दूध का सेवन कैंसर को रोकने में सहायक सिद्ध होता हैं । गाय के गोबर से खेतों में खाद बनती है, कुछ ग्रामीण इलाकों में यही गोबर बायो गैस बनाने के लिए प्रयोग होता है । गाय के मूत्र को कीटनाशक के रूप में प्रयोग होते भी अक्सर देखा जाता है । लेकिन आज इतनी उपयोगी गौ माता संकट से जूझ रही है । आज गाय को उचित आहार नहीं मिल पा रहा है और वो चारा खाने के स्थान पर कचरा खा रही हैं। हालाँकि सरकार ने कुछ चुनी हुई जगह पर गौशालाओं का निर्माण करवाया है लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहर में इनकी सुरक्षा एक चिंता का विषय है । क्योंकि गाय के कचरा खाने से उसका दूध स्वास्थ्य के लिए अमृत ना होकर जहर सिद्ध हो सकता है ।

गाय सुरक्षा सिर्फ एक राजीनीतिक मुद्दा

गाय को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब हलचल मची रहती है। राजनेताओं का अक्सर यह कहते देखा जाता है कि – गाय हमारी माता है, इन्हें कोई खाए हमें पसंद नहीं, इनका कोई अनादर करें हमें मंजूर नहीं । ऐसे में ये प्रशन उठता है कि क्यों अपनी माता को यूंही कचरा खाने दिया जाता है? क्या गौ माता की बेहतरी के लिए सरकार और अन्य राजनीतिक पार्टियों को कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाना चाहिए ? यदि कचरा प्रबंधन या गौ आहार किसी भी कार्य को सही जिम्मेदारी से निभाया जाए तो गौ माता और उसके दूध को दूषित होने से बचाया जा सकता है ।

शुद्धता के विज्ञापन झूठे तो नही

आज सभी लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग है । इसी लिए लोग गाय का शुद्ध दूध, घी, पनीर जैसे उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं लेकिन शुद्धता की गारंटी लेने वाली ये कम्पनियां भी कही ना कहीं ऐसे गायों के दूध से घिरी हो सकती है । इसके लिए ये कम्पनिया सजग हो या ना हों हमे ही आगे बढ़कर अपने और गौ माता की सुरक्षा की जिम्मदारी लेनी होगी । जिससे उनका अमृत जैसा दूध हमे

 

विभा कुमारी, हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग

रामलाल आनंद महाविद्यालय

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