वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली पहली महिला जज बनीं इंदु मल्होत्रा

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली || वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा ने शुक्रवार 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद की शपथ ली। इंदु मल्होत्रा को सीजेआई दीपक मिश्रा ने पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने के साथ ही इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की पहली ऐसी महिला जज बन गई हैं जिन्हे वकील से सीधे जज बनाया गया है। उनका कार्यकाल 3 साल का होगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र को जज के पद के लिए दो नाम भेजे थे। इनमें एक नाम इंदु मल्होत्रा का था और दूसरा उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के.एम जोसेफ का।  लेकिन केंद्र ने पुन: विचार के लिए जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश को लौटा दिया  था।

बता दें कि इंदु मल्होत्रा को 30 साल का अनुभव है। वे सुप्रीम कोर्ट में ही पिछले 30 साल से प्रैक्टिस कर रही थीं। इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की सातवीं महिला जज हैं। उनसे पहले जस्टिस फातिमी बीवी, जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रुमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस रंजना देसाई और जस्टिस आर भानुमति भी सुप्रीम कोर्ट की जज रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब एक साथ दो महिला जज हैं। जस्टिस इंदु मल्होत्रा के साथ ही जस्टिस आर भानुमित भी अभी सुप्रीम कोर्ट में जज हैं।

वहीं इंदु मल्होत्रा के शपथ लेने के साथ ही अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 25 हो गई हैं। हांलाकि इसके अभी भी सुप्रीम कोर्ट में जजों के 36 फीसदी पद खाली हैं।

हालांकि इसके बाद अब जजों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक गलियारे में भी आरोपों का दौर शुरु हो गया है। केंद्र द्वारा जस्टिस जोसेफ के नाम को वापस लोटाने पर कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरु कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के आदेश को खारिज करते हुए हरीश रावत की सरकार को फिर से बहाल किया था। कांग्रेस ने कहा कि इसी आदेश के चलते सरकार ने इस पर राजनीति करते हुए उनका नाम वापस लौटा दिया।

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