क्या सही में हाईकोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों में स्कूल फीस पर पाबंदी का फैसला सुनाया है ?

फीचर डेस्क, खबरिया चौपाल || मई का महिना चल रहा है और गर्मी की 2 महिनों की छुट्टियां शुरु हो गई हैं। लेकिन मई और जून के नाम ने स्कूली बच्चों के परिजनों की परेशानी बढ़ा दी है, और इस परेशानी की वजह है एक मैसेज जो इन दिनों सोशल साइट्स पर काफी वायरल हो रहा है। चलिए सबसे पहले तो आपको बताते हैं कि वो मैसेज क्या है जिसने परिजनों को परेशान कर के रखा हुआ है।

वायरल मैसेज :

High court order

Cp.no 5812 of 2015_

So(G-111)SE 2L/PS/HC/3-859/18

Date 05-03-2018

कोई भी प्राइवेट स्कूल छुट्टियों के दिनों की यानी जून-जुलाई महीने की फीस नहीं ले सकेगा। अगर उस स्कूल ने मना करने बाद फीस वसूली तो उसके खिलाफ कार्यवाही होगी। जिसमे उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती हैं।

इसके लिए अभिभावक पुलिस में शिकायत भी कर सकते है। अगर किसी ने एडवांस में फीस जमा कर दी है तो वापिस मांग लें या फिर अगले महीने में एडजस्ट करा दे। स्कूल फीस ना दे या एडजस्ट ना करे तो पुलिस में शिकायत करे। पुलिस ना सुने तो CM विंडो पर शिकायत करे।

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मैसेज जिस तरह से लिखा है उसे पढ़कर कोई भी पैरेंट्स परेशान हो जाएंगे, क्योंकि बात प्राइवेट स्कूल और पैसों से जुड़ी है। मैसेज देखकर वो पैरेंट्स ज्यादा परेशान होने लगे जिन्होंने जुलाई तक की फीस स्कूलों में जमा करा दी थी। अब सवाल सभी के मन में यही बना हुआ था कि अगर ऐसा है तो उनके पैसे कैसे वापिस मिल पाएंगे ?

मैसेज जंगल में लगी आग की तरह तेजी से फैलने लगा और हमारे पास भी पहुंचा। जब मैसेज को ध्यान से पढ़ा तो उसमें एक सबसे बड़ी कमी देखी गई और वो ये कि मैसेज में सबसे ऊपर हाईकोर्ट ऑर्डर तो लिखा है लेकिन ये कौन-सी हाईकोर्ट है ये नहीं लिखा। मैसेज को जब आगे पढ़ा तो उसमें सीपी नंबर 5812 of 2015 लिखा हुआ था। सीपी नंबर जिसे पिटीशन नंबर कहते हैं। जब मैसेज को और आगे पढ़ा गया तो उसमें गर्मी की छुट्टियों का समय जून-जुलाई दिखाया गया, जबकि भारत में गर्मियों की छुट्टियां मई और जून में होती हैं। अब इतना तो साफ था कि ये फैसला भारत के किसी भी राज्य की हाई कोर्ट का नहीं है।

लेकिन ये जानने के लिए कि आखिर इस नंबर की पिटीशन दायर हुई है या नहीं और अगर हुई है तो कहां हुई है इसके लिए हमने पिटीशन नंबर को इंटरनेट पर खंगाला, जिसके बाद पता चला कि ये फैसला पाकिस्तान के सिंध हाईकोर्टे का है। इंटरनेट पर इस नंबर की पिटीशन तो मिली लेकिन मैसेज कुछ और ही था। पिटीशन में याचिकाकर्ता के वकील कमाल अजफर का नाम सामने आया।

कमाल ने कहा कि, 5 मार्च 2018 को पाकिस्तान के सिंध हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को लेकर एक फैसला सुनाया था। कोर्ट का फैसला स्कूल के पक्ष में रहा था। कोर्ट ने कहा था कि फीस पर एक सीमा तय करनी चाहिए, लेकिन साथ ही हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल की फीस पर कैप नहीं लगाया था। कोर्ट ने फीस से जुड़ी सीमा की बात तो कही थी लेकिन छुट्टियों में फीस पर पाबंदी लगाने की बाद नहीं कही थी।

अब ये भी साफ हो गया कि ना तो भारत में इस तरह का कोई फैसला सुनाया गया और ना ही पाकिस्तान में। फैसला कुछ और था लेकिन उसे तोड़ मरोड़ कर वायरल किया जा रहा है।

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