कश्मीर की सुन्दरता पर दहशतगर्दी का दाग

भगवान जीवन, एक्सपर्ट व्यू || जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का मुद्दा हो या आतंकियों का, राज्‍य सरकार द्वारा इनसे निपटने के लिए किए गए प्रयास मात्र खोखली राजनीति का हिस्सा लगते हैं। बीजेपी द्वारा महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। यह 8वीं बार है, जब जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागा है। इससे पहले मुफ्ती मुहम्मद सईद की मृत्यु के बाद 8 जनवरी, 2016 को गवर्नर रूल लगा जो 87 दिन तक चला जब तक की महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री नहीं बनी।

आज कश्मीर के लोगों की दशा और वहां के हालात किसी से छिपे नहीं हैं, अलगाववादी कश्मीर को आईएस(इस्लामिक स्टेट) की वादी बना रहे हैं। धरती की जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर का तो जैसे अमन ही छिन गया है। वर्ष 2017 में पत्थरबाजी की लगभग 1261 घटनाएं हुईं, 855 केस दर्ज किए गए, जिनमें 2,720 लोग गिरफ्तार किए गए थे। पत्थरबाजी की सबसे ज्यादा 230 घटनाएं श्रीनगर में हुई और सबसे कम 34 बांदीपोरा में। वर्ष 2016 में पूरे जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की 2,808 घटनाएं हुई, जिनमें 8,570 लोग गिरफ्तार हुए थे। वहीं वर्ष 2015 से 2017 तक पत्थरबाजी की 4,736 घटनाएं हुई, जिनमें 11566 जवान घायल हुए थे। कश्मीर में जिस तरह से सुरक्षा दलों पर पथराव हो रहा है वह सैनिकों के धैर्य की परीक्षा लेने वाला है। चिंताजनक बात यह है कि पूरी तरह सब्र रखे हुए हमारे जवानों के हाथ भी बांधे जा रहे हैं। उपद्रवी पत्थर फेंकते हुए खुद चपेट में आ जाए तो भी दोष सेना का ही माना जाता है। कश्मीर में जैसे हालात बन रहे हैं उन्हें देखते हुए सुरक्षाबलों को पत्थरबाजों के खिलाफ सख्ती से पेश आने की इजाजत दी जानी चाहिए, अन्यथा यह उपद्रवियों को छूट देने जैसा होगा।

भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद घाटी में भले ही पत्थरबाजी की घटनाएं कम हुई हों, लेकिन आतंकी साए से कश्मीर में खौफ कायम है। आजकल कश्मीर की आबो हवा ही नहीं, बल्कि पूरा तानाबाना बदल गया है। कश्मीर में कभी आज़ादी की मांग का समर्थन करने वाले दहशतगर्दों को अब आज़ादी नहीं, बल्कि इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर (आईएसजेके) चाहिए।

कश्मीर में सुरक्षा बलों और आतंकियों की मुठभेड़ तथा पत्थरबाजी की घटनाओं की कीमत जम्मू को चुकानी पड़ रही है। यहां पर्यटन कारोबार 90 फीसदी तक कम हो गया है। जम्मू से लद्दाख और कश्मीर में अन्य स्थानों पर जाने वालों की संख्या कम हो गई है। जम्मू पर्यटन के आधारित राज्य है, आतंकी गतिविधियों ने इसे खत्म होने के कगार पर पहुंचा दिया है। पर्यटक दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे जम्मू की आर्थिक रीढ़ टूट गई है। कश्मीर के हालात किसी से छिपे नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इसकी कीमत सिर्फ कश्मीरी चुका रहे हैं। कश्मीर में होने वाली कार्रवाई का बदला पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फायरिंग कर के लेता है। इसके कारण सीमा पर रहने वाले लोगों को रोज जान माल का नुकसान होता है।

धार्मिक स्थलों की बदलती सूरत बताती हैं कि दहशतगर्दों का दबदबा बढ़ा है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि लड़ाई बदल चुकी है। पहले कश्मीर के अलगाववादी युवा आज़ादी के लिए लड़ते थे। वह अपने लोगों को नहीं मारते थे और ना ही पर्यटकों और पत्रकारों को छूते थे। लेकिन जब इरादा बदला है तो उस रास्ते में जो भी आ रहा है, वह उसे खत्म कर रहे हैं।

राज्य में आईएसजेके के मौजूद होने के संकेत भी मिल रहे हैं, जो स्थिति को गंभीर बना रहे हैं। सेना और खुफिया एजेंसियों को भी इसकी आहट मिली है। आए दिन जवानों पर हो रहे हमले, कांग्रेस नेता गुलाम नबी पटेल, राइफलमैन औरंगजेब, संपादक शुजात बुखारी, सब इंस्पेक्टर गौहर अहमद, लेफ्टिनेंट उम्र फय्याज और डीएसपी अयूब पंडित की मौत,इस बात की पुष्टि करती है। राज्य का सामाजिक तानाबाना काफी हद तक तनाव में है। बस लोगों oको अब इंतज़ार है कि कब घाटी में शांति कायम हो और जम्मू में खुशहाली वापस आए।

सुरक्षा की कसौटी पर सेना

कश्मीर में जवानों पर आए दिन हो रही पत्थरबाजी की घटनाएं और पाकिस्तान की ओर से लगातार किए जा रहे सीजफायर के बावजूद भारतीय सेना के लिए देश की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। फिर चाहे वह पाकिस्तान, चीन या अन्य कोई विदेशी ताकत हो या अलगाववादियों से आंतरिक सुरक्षा का मसला हो या चीन द्वारा डोकलाम विवाद, भारतीय सेना ने समय-समय पर अपने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

दरअसल पिछले साल से लेकर अब तक पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ LOC पर कराने में नाकाम रहा है। इस वजह से वह इस सीजफायर उल्लंघन की आड़ में आतंकियों की ज्यादा से ज्यादा घुसपैठ कराना चाहता है। खुफिया सूत्र बताते हैं कि लॉन्चिंग पैड पर आतंकियों की मौजूदगी है और फायरिंग की आड़ में इन आतंकवादियों को सीमा पार से भारत के अंदर घुसपैठ कराने की फिराक में पाकिस्तानी आर्मी है। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियां की बॉर्डर पर चौकसी के चलते यह आतंकी घुसपैठ करने में नाकाम हो रहे हैं।

साल 2011 से सीजफायर की घटनाओं में अप्रत्याशित इजाफा देखने को मिला है। साल 2011 में पाक की ओर कुल 62 बार सीजफायर तोड़ा गया। साल 2012 में 114 बार, साल 2013 में 347 बार, साल 2014 में 583 बार और साल 2015 में 30 नवंबर तक 405 और साल 2016 में 449 बार युद्धविराम तोड़ जा चुका है। साल 2017 की 971 और 2018 के शुरूआती पांच महीनों की घटनाओं पर नज़र डालें तो पता चलता है कि घटनाओं में 5 गुना तक इजाफा देखने को मिल रहा है। इसका एक करण ये भी माना जा रहा है कि भारतीय सेना ने बीते एक साल में अपने ऑपरेशंस में 270 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया है।

जम्मू और कश्मीर में 198 किलोमीटर फैले इंटरनेशनल बॉर्डर, 778 किलोमीटर के लाइन ऑफ कंट्रोल और सियाचिन के 110 किलोमीटर फैले बॉर्डर में ज्यादातर सीजफायर उल्लंघन हो रहे हैं। भारत ने एलओसी के क्षेत्र बलनोई, मेंधार, कलाल, डोडा में पाकिस्तानी आर्मी के कई इलाकों को ढेर किया है। सेना का कहना है कि इन इलाकों में करीब 400 आतंकियों को पाकिस्तान का सपोर्ट मिला हुआ है। लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LOC) पर पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं की संख्या 1250 पहुंच गई है। साल 2017 में ऐसी घटनाओं की संख्या 971 थी। इन घटनाओं में 36 लोगों (सैनिक+सिविलियन) को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 120 से ज्यादा लोग घायल भी हुए। इसके चलते भारतीय सीमा के आस-पास रहने वाले हजारों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है। गृह मंत्रालय ने अपने लिखित बयान में कहा कि युद्ध विराम उल्लंघन और सीमा पार से गोलीबारी के कारण 2015 में 16 नागरिक और 6 सैन्यकर्मी सहित चार BSF के जवान शहीद हो गए. 2016 में 13 नागरिक, 8 सैन्यकर्मी और पांच BSF के जवान शहीद हुए. 2017 में 12 नागरिक, 15 सैन्य कर्मी और चार BSF जवान शहीद हुए।

भारत और दुनिया के अधिकांश देश परमाणु परीक्षण और अपनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करने में लगे हुए हैं। आज दुनिया कई संकटों में घिरी है। इसलिए वर्ष 2017 में विश्व का सैन्य खर्च 1.7 ट्रिलियन तक जा पहुंचा। इस साल स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने अपने रक्षा बजट पर सबसे अधिक राशि 602.8 अरब डॉलर खर्च की है और सबसे कम उत्तरी कोरिया ने 7.5 अरब डॉलर। इसी क्रम में चीन- 175 अरब डॉलर, रूस- 70 अरब डॉलर, सऊदी अरब- 63.3 अरब डॉलर, भारत-62.8 अरब डॉलर। भारत अपनी जीडीपी का 2.5 फीसदी हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर खर्च करता है। भारत का रक्षा बजट पहली बार दुनिया के शीर्ष पांच बजट में शामिल हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Updates |