सरकार ने कौन सी पॉलीथीन पर बैन लगाया है भाई?

        यूपी में बीते कुछ दिनों से हल्ला कट रहा है कि यूपी सरकार ने पॉलीथीन बैग को बैन करके एक सराहनीय कदम उठाया है। हालांकि यूपी से पहले कई ऐसे और भी राज्य हैं जहां पॉलीथीन पर बैन है। खैर सरकार के इस कदम की तारीफ करनी भी बनती है क्योंकि पॉलीथीन एक बड़ा कारण है प्रदूषण का। ये तो सब जानते हैं कि पॉलीथीन अगर जमीन में दबा दी जाए तो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है और जला दी जाए तो हवा में तेजी से प्रदूषण फैलाती है।

सरकार के इस फैसले के बाद से ये तो साफ हो गया है कि अब अगर आप बाजार में जाएंगे तो जूट या कपड़े के बैग को ही इस्तेमाल कर सकेंगे। कोई सब्जी या फल वाला आपको कोई भी सामान पॉलीथीन में नहीं दे सकता। अगर देता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

सब कुछ इसी तरह चलता रहता तो ठीक था। यूपी में सभी जगह से पॉलीथीन बैन हो जाती। लेकिन आप अगर थोड़ा सा ध्यान देंगे तो देखेंगे कि आज भी चिप्स पॉलीथीन के पैकेट में ही मिल रही है। नूडल्स पॉलीथीन के पैकेट में मिल रहे हैं। बड़ी कंपनियों का दूध, दही, मट्ठा, नमकीन सभी कुछ तो पॉलीथीन के पैकेट में मिल रहा है। तो कौन सी पॉलीथीन सरकार ने बैन की है?

चलिए हम बताते हैं कि सरकार ने कौन सी पॉलीथीन बैन की है। सरकार ने वो पॉलीथीन बैन की है जिसमें आप सब्जी लाते हैं, जिसमें आप फल लाते हैं या गरीब ठेले वालों से जिस पॉलीथीन में आप सामान लाते हैं वो पॉलीथीन सरकार ने बैन की है। पॉलीथीन तो बैन हुई, लेकिन गरीब से उसका रोजगार भी छिन गया। उन छोटे लोगों का क्या होगा जो पॉलीथीन बना कर बेचते थे और अपना घर चलाते थे। हम ये नहीं कह रहे कि सरकार का ये कदम गलत है लेकिन नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए। अगर सरकार को पॉलीथीन बैन ही करनी थी उन सभी बड़ी कंपनियों को भी बैन करना चाहिए था जो बड़े स्तर पर पॉलीथीन बनाती है।

अब अगर ये कहकर पल्ला झाड़ लिया जाए कि बड़ी कंपनियों के सामान वाली पॉलीथीन के पैकेट ठेले वालों की पॉलीथीन से कम खतरनाक होते हैं तो भला किससे क्या कह लिया जाए। और ये बात कोई हवाई नहीं है साहाब। बीते दिनों पढ़ा था कि यूपी सरकार ने पॉलीथीन बैन कर दी है, लेकिन आज ही यूपी में एक कंपनी के पॉपकॉर्न खा रहा था जो पॉलीथीन में ही मुझे मिले थे। बस वहीं से सवाल उठ गया कि सरकार ने पॉलीथीन तो बैन कर दी है, लेकिन कौन सी पॉलीथीन बैन की है?

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