जानें जिस ताबूत में करुणानिधि को दफनाया गया था उस पर क्या लिखा था।

विभा कुमारी, नई दिल्ली ।। लगभग 6 दशकों से भी ज्यादा तक दक्षिण भारत की राजनीतिक में चिराग जलाए रखने वाले और दक्षिण भारत की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले DMK प्रमुख एम. करुणानिधि ने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह खबर सुनते ही उनके चाहने वाले अपनी सुध खो बैठे और अपने प्यारे कलाईनार को याद कर रोने लगे। दरअसल उनको चाहने वाले उन्हें प्यार से कलाईनार बुलाते थे, जिसका अर्थ है ‘कला का विद्वान’।

बता दें कि करुणानिधि ने अपनी आखिरी सांस मंगलवार, 7 अगस्त शाम 6 बजकर 10 मिनट पर चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल में ली थी। उनके पार्थिव शरीर को चेन्नै के मशहूर मरीना बीच पर उनके राजनीतिक गुरु सी.एन. अन्नादुरई के पास दफनाया गया। स्वर्गीय करुणानिधि की शव यात्रा शाम 4 बजे राजाजी हॉल से शुरू हुई और 6 बजकर 13 मिनट पर मरीना बीच पहुंची थी।

मरीना बीच पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके परिजन मौजूद रहे। आपको बता दें कि जिस ताबूत में कलाईनर को दफनाया गया उस पर लिखा गया था कि ‘एक ऐसा व्यक्ति जिसने बिना आराम किए काम किया, अब आराम कर रहे है।’

करुणानिधि लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। बीती 28 जुलाई को ब्लड प्रेशर में गिरावट आने की वजह से 94 वर्षीय करुणानिधि को चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने उन्हें कड़ी निगरानी में आईसीयू में रखा था।

अंतिम यात्रा से पहले गुरु के पास जाने के लिए जद्दोजहद

दरअसल राजनीति के ‘पितामह’ कहे जाने वाले करुणानिधि के चाहने वालो और DMK  समर्थकों ने अंतिम संस्कार के लिए मरीना बीच पर जगह की मांग की थी। वहीं पलानीस्वामी की सरकार ने जगह देने से इंकार करके गांधी मंडप के पास जमीन देने की बात कही थी। जिसे लेकर उनके समर्थकों ने खूब हंगामा किया और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा था। समर्थकों के समर्थन में कई विपक्षी नेता भी आ खड़े हुए थे। जिसके बाद मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को आपना फैसला समर्थकों के पक्ष में सुनाया और एम. करुणानिधि के पार्थिव देह को मरीना बीच पर दफनाने की अनुमति दे दी गई। आपको बता दें कि मरीना बीच दुनिया की दूसरी सबसे लोकप्रिय और खूबसूरत बीच हैं। यहां पर करुणानिधि के गुरु सीएन अन्नादुरई, एम. जी रामचंद्रन और जयललिता जैसे नेताओं का अंतिम संस्कार हुआ था। इनका यहां म्यूजियम और समाधि भी बनी हुई है।

राजाजी हॉल में उमड़ा आसुओं का सैलाब

जैसे ही बुधवार, 8 अगस्त की सुबह स्वर्गीय करुणानिधि के पार्थिव शरीर को राजाजी हॉल में रखा गया, ताकि उनको चाहने वाले उनका आखिरी दीदार कर सके। वैसे ही वहां जन सैलाब उमड़ गया था। वहीं कई राजनेता भी अंतिम दर्शन करने पहुंचे थे जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।

बता दें कि इससे पहले मंगलवार को DMK के महासचिव ने बयान जारी करते हुए बताया कि एम. करुणानिधि के पार्थिव शरीर को गोपालपुरम वाले घर ले जाया जाएगा। जहां उनके परिवार वाले और रिश्तेदार भी मौजूद होंगे। सुबह 4 बजे पार्थिव शरीर को राजाजी मॉल में रखा जाएगा। ताकि पार्टी कार्यकर्ता, राजनेता और आम जनता अपने नेता को श्रद्धांजलि दे सके।

राजनीतिक सफर

बता दे कि दक्षिणी की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि का राजनीतिक सफर महज 14 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था। उन्होंने राजनीति में अपना पहला कदम हिंदी विरोधी आंदोलन में भाग लेकर रखा था। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु तमिल मनावर मंद्रम नाम के छात्र संगठन का गठन भी किया था। करुणानिधि पहली बार अपने राजनीतिक गुरु अन्नादुरई की मौत के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद वें 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और एक भी बार चुनाव नहीं हारे।

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