अगर ना होता ये शख्स तो 18 जुलाई को ही मनाया जाता स्वतंत्रता दिवस

विभा कुमारी, स्पेशल रिपोर्ट ।। देश को आजाद हुए 7 दशक से अधिक समय हो चुका है। देश इस बार अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। हम सभी ने स्वतंत्रता संग्राम के किस्से सुने हैं । कैसे स्वतंत्रता सैनानियों ने अंग्रेजों के अत्याचारों को सहा और एकजुट होकर भारत के लोगों को आजादी से जीने का हक दिलाया ।

यही कारण है कि आज हम पूरे अधिकारों के साथ 15 अगस्त पर झंडा लेकर बाहर निकलते हैं और आजादी का जश्न मनाते हैं । लेकिन हममे से बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि हमारा देश 15 अगस्त से पहले ही आजाद हो चुका था ।

हमारा देश भारत 18 जुलाई 1947 में ही अनाधिकारिक रूप से आजाद हो गया था और आजादी की खुशियां मनाने की तैयारियों में था। लेकिन आधिकारिक घोषणा न हो पाने के चलते भारत को 15 अगस्त तक का इंतजार करना पड़ा ।

आखिर 18 जुलाई को आजाद होने के बाद भी 15 अगस्त को क्यों मनाया गया स्वतंत्रता दिवस ?

दरअसल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों का आर्थिक ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया था। उस समय ब्रिटेन की तात्कालीन लेबर पार्टी अपने ही देश में अपना जनाधार खोती जा रही थी। वही भारत में आजादी के मतवाले आजादी पाने की जिद ठाने हुए थे, जगह-जगह पर आंदोलन कर रहे थे। इन सभी चीजों के बीच ब्रिटिश सरकार ने भारत को सत्ता हस्तांतरण करने का फैसला कर लिया। जिसके बाद सत्ता हस्तांतरण और विभाजन के लिए भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारत आए।

माउंटबेटन ने अपनी योजना प्रस्तुत की और योजना के अनुसार भारत को भारत और पाकिस्तान दो हिस्सों में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा। रियासतों को यह छूट दी गई कि वह सत्ता हस्तांतरण के बाद स्वतंत्र रहना चाहते हैं या पाकिस्तान और भारत में शामिल होंगे । इस प्रस्ताव को माउंटबेटन योजना कहा गया ।

18 जुलाई 1947 को यूनाइटेड किंगडम के पार्लियामेंट में स्वतंत्र भारतीय अधिनियम को स्वीकृति मिल गई, जो माउंटबेटन की नीतियों के अनुसार ही थी। यहां हम कह सकते हैं कि ब्रिटिश से भारत को आजादी 18 जुलाई को ही मिल गई थी लेकिन मिली बंटवारे के शर्त पर ।

अब ऐसे में दो सवाल यह उठते हैं । पहला कि जब स्वतंत्र भारतीय अधिनियम को स्वीकृति 18 जुलाई को मिली थी तो स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को क्यों मनाया जाता है? और दूसरा कि रात्री 12:00 बजे ही आजादी की घोषणा क्यों की गई? इन दोनों ही प्रश्नों के उत्तर हैं माउंटबेटन। दरअसल माउंटबेटन ने ही आजादी के लिए 15 अगस्त के दिन को चुना। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन 2 साल पहले द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने आत्मसमर्पण किया था।

क्यों कहे जाते हम भारतीय मिड नाईट चिलड्रेन ?

माउंटबेटन 15 अगस्त को बड़ी ही शुभ तारीख मानते थे। लेकिन भारतीय विद्वानों के अनुसार 15 अगस्त की तारीख शुभ नहीं थी। अब आजादी के लिए बीच का रास्ता निकला गया, रात्रि 12:00 बजे का।

अंग्रेजों के अनुसार नए दिन की शुरुआत रात्रि 12:00 बजे से होती है। वही भारतीय शास्त्रों के अनुसार नए दिन की शुरुआत सूर्योदय के बाद ही होती है। तो इस तरह 18 जुलाई को मिली अनाधिकारिक आजादी की आधिकारिक रूप से घोषणा के लिए 15 अगस्त रात्रि 12:00 बजे का समय सुनिश्चित किया गया और आधी रात के बाद आजाद होने के कारण ही हमें मिड नाईट चिलड्रेन भी कहा जाता है ।

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