सूना रहा था पहला स्वतंत्रता दिवस, ना राष्ट्रगान हुआ ना ध्वजारोहण

प्रिया राणा, स्पेशल रिपोर्ट || उपनिवेशवाद, रंगभेद और आर्थिक शोषण से परेशान भारत के लोगों की आखों में 19वी शताब्दी आते-आते आजादी का सपना पूरी तरह सज चुका था । अब बारी थी तो सिर्फ उस सपने को हासिल करने के लिए सभी के एकजुट होकर संघर्ष करने की ।

स्वाधीनता संग्राम में देश के हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया और लंबे संघर्ष के बाद भारत को आजादी दिलाई । इन स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लोगों के साथ 15 अगस्त 1947 को देश का पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया लेकिन ये स्वतंत्रता दिवस अपने आप में बहुत सूना रहा। देश के पहले ही स्वतंत्रता दिवस पर ना तो कोई राष्ट्रगान गाया गया और न ही लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण हुआ ।

क्यों नहीं फहराया जा सका 15 अगस्त को लाल किले पर झण्डा ?

हमारे देश में प्रधानमंत्री को हर स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर झंडा फहराने का गौरव प्राप्त होता है । लेकिन
इतिहास के पन्नों में लाल किला पहली ही आजादी के जश्न, 15 अगस्त 1947 को सूना रह गया। लोकसभा सचिवालय के एक शोधपत्र के अनुसार, पंडित नेहरु ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले पर झंडा फहराया था। ऐसा इसलिए क्योंकि नेहरू 15 अगस्त को राज-काज के कामों में व्यस्त थे।

क्यों नहीं गाया गया था राष्ट्रगान?

15 अगस्त को जब देश आजाद हुआ उस वक्त तक देश का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था। भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन 1950 में देश का सम्मानित राष्ट्रगान बना। हालांकि हमारा राष्ट्रगान 1911 में गाया जा चुका था।

कैसे टूटे गांधी जी के तमाम सपने?

3 जून 1947 को माउंटबेटन ने जिन्ना के कहने पर भारत विभाजन की योजना रखी। इसमें कहा गया कि पूर्व और पश्चिम के मुस्लिम बहुल इलाकों को मिलाकर पाकिस्तान बनेगा। ब्रिटिश संसद में 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम स्वीकृत किया गया जिसके नतीजे में 15 अगस्त 1947 को भारतीय संघ और पाकिस्तान अस्तित्व में आए। जिससे गांधी जी के तमाम सपने टूट गए।

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