‘काल’ पर भी भारी थे ‘अटल’

संदीप निरंजन सरकार, नई दिल्ली ।। ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं’….शायद ही कोई होगा जो इन पंक्तियों को न जानता हो। ये पंक्तियां पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की हैं। गुरुवार 16 अगस्त को ‘काल के कपाल पर लिखते’ हुए अटल ने दुनिया को अलविदा कह दिया। ये कहना गलत नहीं होगा कि देश की राजनीति के एक युग का अंत हुआ है।

देश की राजनीति का लोकप्रिय चेहरा रहे अटल बिहारी वाजपेयी 93 साल के थे और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं टालूंगा’ जैसे शब्द लिखने वाले अटल ने सही में हार नहीं मानी और लंबे समय तक मौत से जंग लड़ी। अटल बिहारी वाजपायी करीब दो महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे और 16 अगस्त की शाम 5 बजकर 5 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली।

शाम को अटल बिहारी वाजपायी के पार्थीव शरीर को उनके निवास स्थान पर पहुंचाया गया जहां उन्हे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज में रखा गया है। 17 अगस्त को उनके पार्थीव शरीर को आखिरी दर्शन के लिए बीजेपी मुख्यालय में रखा जाएगा। जिसके बाद उन्हे पंचतत्व में विलीन किया जाएगा।

बता दें कि तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी को डिमेंशिया नाम की बीमारी ने घेरा हुआ था। जिसके चलते वे अस्वस्थ थे और सार्वजनिक जीवन से दूर थे। वाजपेयी 2009 से ही व्हीलचेयर पर थे। साल 2014 में जब बीजेपी की सरकार आई तो उनका नाम भारत रत्न के लिए चुना गया और 2015 में जब उन्हे भारत रत्न से सम्मानित किया गया तभी देशवासियों ने उन्हें आखिरी बार देखा था। अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित करने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी खुद उनके आवास पहुंचे थे।

अटल बिहारी वाजपेयी लंबे समय से बिमार चल रहे थे लेरिन यूरिन में इन्फेक्शन की वजह उन्हे 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हे अपनी देखरेख में रखा हुआ था। पीएम मोदी और बीजेपी नेताओं सहित दूसरी पार्टियों के तमाम बड़े नेता लगातार उनका हालचाल जानने पहुंच रहे थे। लगातार उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की जा रही थी लेकिन 16 अगस्त को उनका निधन हो गया।

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