जब 16 साल पहले वाजपेयी ने परख ली थी मोदी की राजनीति

जुली सिंह, नई दिल्ली ।। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में वाजपेयी ने आखिरी सांस ली। वाजपेयी न सिर्फ एक अच्छे लेखक और दिग्गज नेता रहे बल्कि दूर की नजर रखने वाले पार्खी शख्स भी थे। शायद यही वजह थी कि आज से करीब 16 साल पहले उन्होंने नरेंद्र मोदी की राजनीति को परख लिया था और उन्हे गुजरात की सत्ता सौंपी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनीति के दिग्गजों में से एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हमेशा से बेहद ही मधुर और विनर्म संबंध रहे हैं। दोनों के बीच गुरु और शिष्य वाला रिश्ता देखा जाता था। नरेंद्र मोदी जब भी वाजपेयी जी से मिलते थे तो सिर झुकाकर उनके गले लग जाते थे और वाजपेयी भी बड़े ही प्यार से अपने थरथराते हुए हाथों को उठाकर उनकी पीठ पर रखकर उनको आशीर्वाद दिया करते थे। यही कारण है कि पिएम मोदी अपने हर भाषण में वाजपेयी और उनके द्वारा पढ़ाए गए पाठ को याद करना नहीं भूलते।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत पसंद करते थे। उन्होंने ही पीएम मोदी को सत्ता में आने की सलाह दि थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के संबंध भी अच्छे हुआ करते थे। मोदी आडवाणी के बेहद करीब थे इसीलिए दिल्ली आने पर पार्टी के ऑफिस में समय गुजारते थे। यही वो वक्त था जब आडवाणी के जरिए मोदी, अटल बिहारी के भी करीबी बन गए। इसी खास समय में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी के अंदर छिपी प्रतिभा और क्षमता को पहचाना। तभी से वाजपेयी के मन मे नरेंद्र मोदी को राजनीति के एक अहम चेहरे के रुप में देखने की जिज्ञासा पनप उठी थी।

वाजपेयी एक दूरगामी दृष्टि रखने वाले नेता कहे जाते थे और यही वजह थी कि वो नरेंद्र मोदी को राजनीति में लाए। जिसके बाद नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम बने और लगातार 3 बार गुजरात की सत्ता संभाली। इतना ही नहीं जब गुजरात की राजनीति को छोड़ा तो सीधे देश के पीएम बन गए।

दरअसल हुआ यूं कि जब साल 1995 में गुजरात में विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी बहुमत से आई। जिसके बाद नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला को पूरी तरह से पार्टी से दरकिनार कर के केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। इतना ही नहीं मोदी को दिल्ली बुला लिया गया। साल 1998 में गुजरात में मध्यावधि चुनाव कराए गए। इस दौरान भी मोदी को राजनीति से दूर रखा गया और वो दिल्ली में ही रहे। लेकन साल 2001 में आए भूकंप के बाद केशुभाई पटेल ने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी को फोन कर पीएमओ बुलाया और गुजरात जाकर सीएम पद संभालने को कहा। साल 2002 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सीएम पद की कमान संभाली और लगातार तीन बार सीएम चुने गए।

काल के कपाट पर लिखने वाले वाजपेयी काल पर भी भारी थे। तभी तो उन्होंने कहा था कि ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’।।

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