समाज को खुद समझने की जरुरत, महिलाएं कोई ‘सामग्री’ नहीं

जुली सिंह, नई दिल्ली।। देशभर में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध थमने का नाम नही ले रहें और ना ही उनकी सुरक्षा से संबंधी सरकार कोई बड़े कदम उठाती दिख रही है। इससे गंभीर और तकलीफदेह बात ये है कि महिलाओं के साथ होने वाले इन अपराधों में भी महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है। इतना ही नही उन्हें एक सामग्री तक का नाम दे दिया जाता है।

इन सभी मामलों को बढ़ावा देते हुए बड़े-बड़े नेता और साधू संत भी महिलाओं के प्रति विवादित बयानबाजी करने से नहीं चूकते। इसी बीच जैन मुनि विश्रांत सागर ने विवादित बयान देकर आलोचनाओं मे घिर गए हैं।

दरअसल सीकर जिला मुख्यालय मे चातुर्मास कर रहे जैन मुनि ने बुधवार 29 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मे कहा कि देशभर में लड़कियों के साथ होने वाले आपराधिक घटनाओं मे 95 फीसदी गलती लड़कियों की होती है। वो एक सामग्री की तरह है, उन्हे संयम के साथ रहना चाहिए। आज के युग मे लडकियों को बेहद संभल कर चलने की जरुरत है, क्योकि महिलाओं के साथ अनके पिहर और ससुराल की इज्जत जुड़ी होती है और उन्हे इसे बचाकर रखना चाहिए ।

जैन मुनि की बिगड़ी बोली यहां भी नही रुकी अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ये भी कह दिया कि आज के समय में लड़कियों को पाश्चात्य संस्कृति के बहकावे में ना आकर संस्कारों व संयमता के साथ शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

लेकिन जैन मुनि के इस बयान पर सवाल ये उठता है कि, क्या महिलाओं को अपने घर की इज्जत बचाए रखने के लिए उन्हें घर से बाहर नही निकलना चाहिए? भारत जैसे देश में जहां महिलाएं विदेशों से गोल्ड मैडल जीतकर नाम कमा रही है, इसके बावजुद भी जैन मुनि की ऐसी बयानबाजी शर्मिंदा करने वाली है। चलिए अगर यह भी मान लिया जाए कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में उनकी गलती है,क्योकि वो सयंमता के साथ न रहकर लड़को को आंख उठा कर देखती है। तो सवाल ये भी उठता है कि कठुआ जैसे दिल दहला देने वाली घटना में किसकी गलती मानी जाए? क्या इसमे भी उस छोटी बच्ची की गलती है? या उसका पहनावा खराब था? उस छोटी बच्ची ने अपने बड़े भाई और पिता समान लोगो पर गंदी नजर उठा कर देखी थी?

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