एनआरसी लिस्ट में नहीं था मां का नाम तो युवक ने कर ली खुदखुशी

श्री कृष्ण, नई दिल्ली ।। असम में रह रहे 37 वर्षीय युवक ने अचानक आत्महत्या कर ली। खुदकुशी का कारण यह था कि उसके पास मां की नागरिकता का केस लड़ने के लिए बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। यह घटना रविवार की बतायी जा रही है जब युवक का शव पेड़ से लटका मिला। मृतक युवक किसी तरह मजदूरी करके अपना घर भार चलाता था। वह लम्बे समय से परेशान भी बताया जा रहा था क्योंकि एनआरसी की लिस्ट में उसकी मां का नाम नहीं था। जितने भी पैसे उसने जोड़े थे वह सभी मां की नागरिकता के लिए खर्च कर दिये थे।

फॉरनर्स ट्रिबयूनल में केस हार गई थी बिनय की मां  

रिपोर्ट के मुताबिक मृतक युवक का नाम बिनय चंद है। बिनय की मा को असम की मतदाता सूची में कोई जगह ही नहीं दी गई थी। उसके बाद बिनय ने मां की नागरिकता का केस लड़ने के लिए फॉरनर्स ट्रिबयूनल का दरवाजा खटखटाया। आगे चलकर बिनय ने मजदूरी करके थोड़ी रकम भी जमा की और वह सारी रकम केस लड़ते लड़ते खत्म हो गई।

कुछ पड़ोसी व अन्य परिवार वालों ने बताया कि फॉरनर्स ट्रिबयूनल में बिनय की मां केस हार गई थी लेकिन बिनय न्यान पाने के लिए हाई कोर्ट में भी केस डालना चाहता था। लेकन युवक के पास केस लड़ने के लिए अब बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। जिसकी वजह से वह काफी परेशान भी रहने लगा था और उसने इसी परेशानी के चलते खुदकुशी कर ली।

हम मजदूर लोग हैं, हमारे पास पैसे नहीं है- शांति चंद

मृतक युवक का कुछ दिनों पहले ही एक बेटा पैदा हुआ था। बिनय चंद की मां शांति चंद ने बात करते हुए बताया कि हम मजदूर लोग हैं हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम हाई कोर्ट तक जा सकें। उन्होंने आगे बताया कि बिनय काफी दिनों से बहुत परेशान रहने लगा था। धीमी आवाज में बोलते हुए मां ने कहा कि कई बार तो वह मुझे भी डांट देता था कि मै बिना पैसों के तुम्हारा केस कैसे लड़ूं ?

वहीं, दूसरी तरफ पड़ोस के बाबुल डे बताते हैं कि 1960 से यह वोट देती आ रही हैं। इनके पास अपनी जमीन के कागजात भी मौजूद हैं। लेकिन फॉरनर ट्रिबयूनल ने बिनय की मां को अज्ञात नागरिक के तौर पर रखा हुआ था और परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वह न्याय के लिए हाई कोर्ट तक जा सकें। इस तरह की समस्याओं से गरीब परिवारों की लड़ाई बहुत कठिन हो जाती है। जिसकी वजह से उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।

हालांकि आपको बता दें कि एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) असम में 40 लाख लोगों के नाम मौजूद नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें इस देश का नागरिक नहीं माना गया। बिनय का परिवार भी इस परेशानी का उदाहरण है। जिनको संदिग्ध नागरिक के तौर पर बताया गया है।

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