डूसू इलेक्शन में लहराया भगवा

विभा कुमारी, नई दिल्ली ।। छात्रसंघ के चुनाव को देश की राजनीति की बुनियाद माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि युवाओं में राजनीति का बीज इन्हीं चुनावों से पनपता है और आगे चलकर ये राजनीति के वट वृक्ष बन जाते हैं। आपको बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को इस पाठशाला की परीक्षाएं हो चुकी हैं और 13 सितंबर को इसका परिणाम भी आ चुका है। जिसमें बीजेपी के छात्र संघ की इकाई एबीवीपी ने बाजी मारी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के चुनाव में 3 सीटें हासिल किए है। जिसमें 20,467 वोट लेकर अंकिव बसोया प्रेसिडेंट, 23,046 वोटों के साथ शक्ति सिंह वॉइस प्रेसिडेंट और 19,353 वोटों के साथ ज्योति चौधरी जॉइंट सेक्रेटरी बने हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी के छात्र संघ की इकाई एनएसयूआई के खाते में महज एक ही सीट गई, सेक्रेटरी की। एनएसयूआई के आकाश चौधरी 20,198 वोटों के साथ डूसू के सेक्रेटरी बने हैं।

बात करें पिछले साल यानी 2017 के चुनावी नतीजों की तो उसमें एबीवीपी को महज दो ही सीटें मिली थी, सचिव और संयुक्त सचिव की। वहीं एनएसयूआई को भी दो सीटें हासिल हुई थी, अध्यक्ष और संयुक्त अध्यक्ष की। पिछले साल के मुकाबले में इस साल एबीवीपी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। वहीं एनएसयूआई के प्रदर्शन में गिरावट आई है।

नाटकीय रही चुनाव की गिनती

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव के वोटों की गिनती बहुत ही नाटकीय रही। ABVP और NSUI के बीच कड़ी टक्कर भी देखने को मिली। बता दें कि 13 सितंबर, 2018 को सुबह तकरीबन 8:30 बजे शुरू हुई वोटों की गिनती को EVM में तकनीकी खराबी के चलते कई बार रोकना पड़ा था। वोटों की गिनती करीब 3 से 4 बार रोकनी पड़ी थी। जिसके कारण बेसब्री से नतीजों का इंतजार कर रहे छात्र नेताओं और उनके समर्थकों के बीच आक्रोश काफी बढ़ गया था। इन सारी नाटकीय घटनाओं के बाद आख़िरकार तकरीबन 9 बजकर 30 मिनट पर डूसू का रिजल्ट घोषित हुआ और पिछले साल दो सीटें हासिल करने वाली बीजेपी के छात्र संघ की इकाई एबीवीपी ने 3 सीटें आपने नाम की।

2019 के फाइनल से पहले सेमीफाइनल

देश में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां जोरों शोरों से राजनीतिक गलियारे में चल रही है। वहीं कई राज्यों में इसी साल विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। इसके मद्देनजर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के चुनाव को 2019 के फाइनल से पहले एक सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा था। ऐसा माना जा रहा था कि डूसू में जिस भी पार्टी के छात्र संघ इकाई की जीत होगी, 2019 में राजनिति के महामुकाबले में उसी पार्टी की लहर सबसे अधिक होगा। ऐसे में डूसू के नतीजों से साफ हो गया है कि आज भी युवा वर्ग BJP को ही अधिक पसंद करता है। यही कारण है कि कॉलेज में भी बीजेपी की छात्र संघ इकाई का ही बोल बाला है।

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