दो हफ्ते में 11 बच्चों की मौत का चौकाने वाला मामला

जुली सिंह, न्यूज डेस्क।। देश में स्वास्थय व्यवस्था को लेकर तरह तरह के  दावे ठोके जाते हैं लेकिन इनकी हकीकत सामने आती दिखती है। अस्पतालों की लापरवाही के कारण मरीजों की जान चले जाने की खबरे आए दिन सुनने को मिल जाती है। इनमें से अधिकतर मामलों में अस्पताल प्रशासन या तो अपनी गलती मानने से इंकार कर देता है या फिर इस बारे में बात ही नहीं करता। ऐसा ही कुछ राजधानी दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ।  उत्तरी दिल्ली के किंग्सवे कैंप स्थित नगर निगम के महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल मे पिछले लगभग दो हफ्तों में करीब 11 मासूम बच्चे अपने जान से हाथ धो बैठे हैं। छानबीन मे पता लगा कि ये सभी बच्चे डिप्थीरिया के शिकार थे।

सरकार द्वारा डिप्थीरिया के लिए जागरुकता और इलाज दोनो मुहैया कराए जाते हैं ऐसे में इन 11 मौतों से अस्पताल पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या इन अस्पतालों मे डिप्थीरिया से निजात पाने के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नही है? जहां एक तरफ मृतक बच्चों के परिजनों का आरोप है कि सबसे बड़े संक्रामक रोगों का अस्पताल होने के बावजूद भी इस अस्पताल में डिप्थीरिया से निजात पाने के लिए वैक्सीन भी मौजूद नहीं है। वहीं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गुप्ता ने मृतकों के परिजनों से कहा कि इन बच्चों की मौत टीके के कारण नहीं, बल्कि हालत ज्यादा खराब होने से हुई है।

इस बीमारी का शिकार हुए बच्चों मे करीब 10 बच्चे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों के रहने वाले हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का ही रहने वाला है। सभी मृतक बच्चों की उम्र करीब एक से नौ वर्ष है। कुछ लोगों का कहना है कि अस्पताल मे सही इलाज ना होने के कारण इतनी मौत हो रही है हम अपने बच्चों को किसी और अस्पताल मे ले जाना चाहते हैं। इस बीमारी के कारण 11 से 12 बच्चों के मौत के बाद अभी भी करीब 300 बच्चे अस्पताल मे भर्ती हैं।

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