कश्मीर में बंदूक पर भारी पड़ा बैलेट

दीपक स्याल, न्यूज डेस्क।। जम्मू कश्मीर एक ऐसा राज्य है जहां कभी आतंकवाद की जड़े इतनी मजबूत थी कि बन्दूक से डर कर लोग लोकतंत्र के सबसे बड़े  पर्व,चुनावों से वंचित रहते थे। जब सम्पूर्ण राष्ट्र अपने वोट की ताकत से सरकार बदलता था तब जम्मू कश्मीर के वोटर घर में छुप कर चुनाव खत्म होने का इंतजार करते थे। उनके लिए चुनाव कर्फ्यू से कम न था। यदि हम वर्तमान समय की बात करे तो समय बदल गया है। जम्मू कश्मीर में इस बार स्थानीय निकाय चुनावों में बन्दूक नहीं बैलेट का बोल बाला है।

बता दें कि कश्मीर में अभी स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं जिसमे आतंकी संघटनो ने आम जनता को वोट न करने की धमकी दी है, लेकिन आतंकियों की धमकी का कुछ खास असर चुनावो पर होता नहीं दिख रहा है। कश्मीर की जनता बढ़ चढ़ कर लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाते दिखाए दे रहे है। आलम तो यह है कि एक समय के आतंकवादी रहे फारुक अहमद खान ने अब बन्दूक की राह छोड़ भारतीय जनता पार्टी से चुनाव लड़ रहे है।

शहरी निकाय चुनाव 8 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2018 तक चलने है, जिसका रुझान 20 अक्टूबर तक आने के आसार है। अभी तक के चुनाव पर नज़र रखी जाए तो बुद्धवार 10 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक अनंतनाग में 0.6%, बांदीपुरा में 14.32%,  बारामुला में 1.1%, कुपवाड़ा में 3%, श्रीनगर में 0.8%, किश्तवार में 34.1% डोडा में 36.5%, रामबन में 35.1%, रेयासी में  35.7%, उधमपुर में 30.2% तथा कठुआ में 39.4% वोट डाले जा चुके थे। इनमे से कई वोटिंग बूथ तो ऐसे हैं जहां कभी मात्र उमीदवार ही वोट डालने आते थे हालांकि 17 पोलिंग बूथ आज भी ऐसे हैं जहां एक वोट भी नहीं डाला गया। लम्बे समय से आतंकवाद की मार झेल रहे कश्मीर में बदलाव तो आ रहा है और निरंतर आता रहेगा। आवाम और जवान के बीच जो भरोसे की नीव  रखी गयी है यह उसी का नतीजा है कि आज कश्मीर के मतदाता बिना डरे मतदान करने अपने घरों से निकल कर आए हैं।

माना जा रहा है कि आज जिन बूथ पर मतदान नहीं हुए यदि वहां 0.1% भी मतदान भविष्य में होते हैं तो यह बन्दुक की हार और लोकतंत्र की जीत होगी।

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