क्या हर साल पुतला जलाने से ही हो जाएगा रावण का अंत?

विभा कुमारी, दशहरा स्पेशल ।। रावण एक ऐसा नाम, ऐसा व्यक्ति जिसे हर कोई बुराई का प्रतीक मानता है। लोग समझते हैं कि वर्ष में एक बार दशहरे के मौके पर रावण का पुतला जला देने से उनके जीवन से, उनके समाज से बुराइयों का नामोनिशान मिट जाएगा। लेकिन समाज में छिपे उन रावणों का क्या जिनके चलते आए दिन कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ती है,  यौन शोषण और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है, गरीबों को दो वक्त की रोटी के लिए इंतेजार करना पड़ता है, शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता भी शर्मसार हो जाता है। आज हम आपको समाज में छिपे उन्हीं रावण के बारे में बताएंगे जिनसे देश के लोग आज बेहद परेशान हैं। आज उन रावणों को जलाने की जरूरत है ना कि एक पुतले को जलाने की।

महंगाई का रावण

आज समाज में महंगाई एक ऐसा रावण बन बैठा है जो दिन प्रतिदिन बड़ा होता ही चला जा रहा है। जिसके चलते लोगों का गुजर-बसर करना भी मुश्किल हो गया है। पेट्रोल- डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों की जिंदगी का चक्का जाम कर रखा है। तो टमाटर भी लाल हुआ बैठा है। वहीं प्याज की बढ़ती कीमतों ने लोगों को रुला रखा है। सरकार ने उज्जवला योजना के तहत सबको रसोई गैस देने की बात तो कही। लेकिन इसकी बढ़ती कीमतों पर लगाम नहीं लगा सकी। रसोई गैस की कीमतें दिन दुगनी और रात चार गुनी बढ़ती ही जा रही है। अगस्त में जहां रसोई गैस की कीमत प्रति सिलेंडर 789.5 रुपये थी, वहीं अक्टूबर में इसकी कीमत बढक़र 879 हो गई। हालांकि सब्सिडी के साथ एक सिलेंडर की कीमत 483 का ही पड़ता है। लेकिन उसमें भी सरकार स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील करती ही रहती है।

भ्रष्टाचार का रावण

देश को आजाद हुए लगभग 7 दशक से ज्यादा का भी वक्त हो चुका है। लेकिन आज भी हमारा देश भ्रष्टाचार के दलदल में इस कदर फंसा हुआ है कि देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा यही बनी हुई है। अमीर हो या गरीब नेता हो या राजनेता जिसको जहां मौका मिलता है घोटाला करने से वह पीछे नहीं हटता। बता दें कि आजकल दो-तीन घोटाले बहुत चर्चा में हैं।

1) विजय माल्या घोटाला- विजय माल्या जो देश का जाना माना कारोबारी है। माल्या ने अलग-अलग बैंकों से 9000 करोड़ रुपए का पहले तो लोन लिया। फिर लोन न दे पाने की स्थिति में देश छोड़ विदेश भाग गया। इसीलिए अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया है।

2) नीरव मोदी घोटाला- नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चौकसी ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए पंजाब नेशनल बैंक में तकरीबन 11,300 करोड रुपए का घोटाला किया। जो अभी तक का सबसे बड़ा घोटाला है। मालूम हो कि नीरव मोदी और मामा मेहुल चौकसे दोनों ही एक हीरा कारोबारी हैं। इस वक्त दोनों ही विदेशों में छुपे बैठें हैं।

3) चारा घोटाला- यह घोटाला जानवरों के चारा से जुड़ा है। ये घोटाला बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था। इस मामले लगभग 900 करोड़ का घोटाला हुआ था, जिसमें लालू प्रसाद यादव भी शामिल है। चारा घोटालें मामले में लालू प्रसाद यादव पर क़ानूनी कार्रवाई चल रही हैं। वहीं एक मामले में उन्हें 5 साल की सजा भी मिल चुकी है।

ऑफिस के रावण

आज बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। तो वहीं ऑफिस में ऊंचे पद पर बैठने वाले लोग अपने आप को आका समझ बैठे हैं। उनके पास अगर कोई नौकरी मांगने जाता है तो वह उनका पहले फायदा उठाना चाहते हैं। उनका यौन शोषण, उत्पीड़न करते हैं और कई तरीके से उनको मानसिक रूप से भी शोषित करते हैं। भारत में आजकल #MeToo कैंपेन की आंधी चल रही है। जिसमें ऐसे ही कुछ रावणों के चेहरे बेनकाब हुए हैं। जिसके तहत अभी तक नाना पाटेकर, साजिद खान, एमजे अकबर जैसे नामचीन लोगों का नाम बाहर आ चुका है। ऑफिस के रावण अपनी भूख को मिटानें के लिए प्रमोशन का झांसा देते हैं या नोकरी से हटा देने की धमकी दे डालते हैं। ऐसे रावण ना केवल महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं, बल्कि पुरुषों को भी अपना शिकार बनाते हैं। और अगर बॉस की नजरों से महिलाएं बच जाती हैं तो उसके साथ में काम करने वाले ही उस पर टकटकी लगाए बैठे रहते हैं। आज समाज को इन जैसों से छुटकारा पाने की जरूरत है।

रास्ते का रावण

आज हम 21वीं सदी में हैं, जहां पर लड़के और लड़कियों, दोनों को बराबर का अधिकार दिया गया है। चाहे वह कहीं बाहर जाने का हो या पढ़ाई करने का। लेकिन आज भी लड़कियां जब अकेली बाहर जाती हैं तो सड़कों पर खड़े कुछ मनचलों की आंखें उन्हें घूरती रहती हैं। मनचले उन पर कमेंट पास करते हैं, उनके शारीरिक बनावट को लेकर बातें बनाते हैं। उन्होंने क्या पहना है? उनका कौन सा अंग दिख रहा है? कौन सा ढका है? इस पर फबतियां कसते हैं।

स्कूल कॉलेजों के रावण

स्कूल कॉलेजों को विद्या का मंदिर समझा जाता है। वहां पर मां-बाप बच्चों को इसी उद्देश्य से भेजते हैं ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके। लेकिन यहां पर भी किसी न किसी की निगाह में एक रावण छिपा होता है, जो कई बार बच्चों के उत्पीड़न या मौत का कारण बन जाता है।

आपको याद होगा गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल का मामला। जहां 9 सितम्बर 2017 को एक 8 वर्षीय प्रद्युमन की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी।

वहीं 4 अक्टूबर 2017 को मालवीय नगर इलाके में एक स्कूल में ही बच्ची के साथ रेप कर दिया गया था। रेप करने वाला कोई और नहीं था स्कूल का ही एक कर्मचारी था।

कापसहेड़ा के स्कूल में तो हद ही पार हो गई थी, जब 2016 में आठवीं के एक छात्र ने अपने सहपाठी के साथ छेड़छाड़ की थी। ऐसा नहीं है कि स्कूलों-कॉलेजों में रावण केवल कर्मचारियों में ही होता है। यह रावण तो छात्रों में भी दिखाई देता है।

2016 में पश्चिमी नांगलोई के एक स्कूल में क्लास के सभी बच्चों के सामने ही दो छात्रों ने अपने शिक्षक को चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया था।

राजनीति के रावण

राजनीति किसी देश का आधार माना जाता है। देश की राजनीति अगर स्वस्थ रहे तो देश का विकास भी सही से होगा। लेकिन हमारे देश की राजनीति में रावणों की कमी नहीं है। विभिन्न राजनीतिक पदों पर किसी ना किसी रूप में कोई ना कोई रावण जरूर बैठा हुआ है। मान लीजिए अगर किसी योजना के तहत कुछ राशि आवंटित की जाती है, तो गरीब मजदूर को उसका आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाता है। क्योंकि बाकी का पैसा हमारें राजनीति के ठेकेदारों की जेब में जो चला जाता है।

नेता के रूप में छुपे यह रावण महिलाओं के साथ यौन शोषण करते हैं। ताकत का रौब दिखाकर, पद उन्नति का लालच देकर या शादी का झांसा देकर। वहीं पैसों का और जमीन का भी घोटाला करते हैं। राजनीतिक में आने से पहले इनके पास पैसे भले ही कम होते हैं। लेकिन जैसे ही इनकों कोई राजनीतिक पद मिल जाता है इनकी तिजोरी भर जाती है। जनता का उद्धार हो चाहे ना हो, पर इन नेताओं का उद्धार हो जाता।

दोस्ती के रावण

दोस्ती एक ऐसा पाक रिश्ता है जिसमें विश्वास, भरोसा, प्यार सब कुछ होता है। कई बार तो दोस्त परिवार वालों से भी ज्यादा दिल के करीब होते हैं। उनके साथ हम अपना हर दुख, दर्द, तकलीफ़, हंसी, खुशी बिना किसी हिचकिचाहट के बांट लेते हैं। लेकिन आजकल कई जगहों पर यह रिश्ता भी अपना दम तोड़ता नजर आ रहा है। खासकर सोशल मीडिया के आने से इस रिश्ते पर काफी असर पड़ा है।

बता दें कि मार्च 2018 में दिल्ली विश्वविद्यालय की साउथ कैंपस में स्थित राम लाल आनंद कॉलेज के छात्र आयुष की हत्या उनके दोस्त ने ही कर दी थी। मालूम हो कि आयुष और आरोपी की दोस्ती तकरीबन 10 दिन पहले एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। इस 10 दिन की दोस्ती में दोनों तकरीबन 3 बार मिल भी चुके थे। चौथी बार जब वह मिले दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई और आयुष ने यह दोस्ती खत्म करने की बात कही। इससे नाराज आरोपी ने आरोप आयुष को मौत के घाट उतार दिया।

अब देखने वाली बात होगी कि कब तक समाज के लोग बुराइयों को खत्म करने के लिए दशहरे के मौके पर रावण के पुतले को ही जलाते रहेंगे। लोगों की आंखें तब खुलेगी, जब वह देश और समाज में मौजूद असली रावण के चेहरें को पहचानेंगे, उसे जलाने की कोशिश करेंगे। जिस दिन ऐसा हो जाए उसी दिन हमारे समाज में असली दशहरा मनाया जाएगा।

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