रावण के बारे में जानकर पता चलेंगी उसकी अच्छाइयां

जूली कुमारी, दशहरा स्पेशल ।। रावण की बुराइयां तो सब जानते होंगे लेकिन रावण की अच्छाइयां शायद ही लोग जानते हैं। आज रावण को बुराई का प्रतीक इसलिए माना जाता है क्योंकि उसने दूसरों की स्त्री का हरण किया था और वो राक्षसी प्रवृत्ति का था। लेकिन इस बुराई के पिछे रावण के कई अच्छे गुण भी हैं, चलिए आपको बताते हैं रावण में कौन-कौन से अच्छे गुण थे?

रावण अहंकारी तो था लेकिन महापंडित और महाज्ञानी भी था। रावण भगवान शिव का सच्चा भक्त था।  कहा जाता है कि रावण ने देवलोक की विजय के पश्चात यमलोक में भी आक्रमण किया। ब्रह्मा जी के वरदान के कारण उसने यमराज को पराजित कर यमलोक पर विजय प्राप्त की और नर्क भोग रही आत्माओं को अपनी सेना में सम्मिलित कर लिया। इसके अलावा रावण कई शास्त्रों के रचयिता भी हैं। रावण बहुत बड़ा शिवभक्त था। उसने ही शिव की स्तुति में तांडव स्रोत्र लिखा था। रावण ने ही अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी। चिकित्सा और तंत्र के क्षेत्र में भी रावण के कई चर्चित ग्रंथ हैं।

रावण ज्योतिष का बहुत ज्ञानी कहा जाता है। एक बार जब राम वानरों की सेना लेकर समुद्र तट पर पहुंचे, तब राम रामेश्वरम के पास गए और वहां उन्होंने विजय यज्ञ की तैयारी की। उसकी पूर्णाहुति के लिए देवताओं के गुरु बृहस्पति को बुलावा भेजा गया, लेकिन वो आ ना सके। अब सोच-विचार होने लगा कि किस पंडित को बुलाया जाए ताकि विजय यज्ञ पूर्ण हो सके। तब प्रभु राम ने सुग्रीव से कहा- ‘तुम लंकापति रावण के पास जाओ।’

सुग्रीव प्रभु राम के आदेश से लंकापति रावण के पास गए। रावण यज्ञ पूर्ण करने के लिए तैयार हो गया और कहा- ‘तुम तैयारी करो, मैं समय पर आ जाऊंगा’। रावण पुष्पक विमान में माता सीता को साथ लेकर आया और सीता को राम के पास बैठने को कहा, फिर रावण ने यज्ञ पूर्ण किया और राम को विजय का आशीर्वाद दिया। उसके बाद रावण सीता को लेकर लंका चला गया। लोगों ने रावण से पूछा- ‘आपने राम को विजय होने का आशीर्वाद क्यों दिया?’ तब रावण ने कहा- ‘महापंडित रावण ने यह आशीर्वाद दिया है, राजा रावण ने नहीं।’

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