22 ट्रांसजेंडर की टीम करेगी इस रामलीला की झांकी की प्रस्तुती

निखिल कुमार झा, दशहरा स्पेशल ।। बिहार में इस बार का दशहरा हर बार से कुछ हटकर होने वाला है। बिहार में पटना के गांधी मैदान इस बार की रामलीला में ज्यादि भीड़ दिखने वाली है। इसका सबसे बड़ा कारण है इस बार की झांकी में कुछ अलग दिखना। इस बार की रामलीला की झांकी केरल से आई 22 ट्रांसजेंडर की टीम प्रस्तुत करेगी। जिसमें मुख्य अतिथि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहेंगे। इसका उद्घाटन बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन के द्वारा किया जाएगा। इस झांकी में सबसे विशेष बात यह है कि अभी हाल फिलहाल में ही सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को समाप्त किया है और बिहार में ट्रांसजेंडरों के द्वारा रामलीला झांकी की प्रस्तुति की जाना अपने आप में एक नया विषय है। जो समाज में एक बहुत बड़ा संदेश दे रही है।

श्रीराम लीला महोत्सव के समिति अध्यक्ष कमल नोपनी के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार  4:15 पर नीतीश कुमार का आगमन होगा और 4:30 पर राज्यपाल टंडन के द्वारा समाहरो का उद्घाटन किया जाएगा।

मनमोहक आतिशबाजी का होगा प्रदर्शन

आयोजन समिति सदस्य सुषमा साहू का कहना है कि इस बार रावण वध में इको फ्रेंडली पटाखे छोड़े जाएंगे, जो आकाश को रंग बिरंगा बनाएंगे। इसके लिए पश्चिम बंगाल और कोलकाता से आतिशबाजी की एक विशेष टीम को बुलाई गई है। इसके अतिरिक्त मैदान में हर जगह तोरण लगाए गए है। तथा जगह-जगह पर जय श्री राम का केसरिया पताका भी लगाया गया है। सुषमा साहू का यह भी कहना है कि इस मौके पर राम दरबार झांकी, लंका दहन, मेघनाथ कुंभकरण संवाद, रावण वध, आदि सब श्रोताओं को अलग ही अनुभूति कराएगी।

क्या है सुरक्षा के इंतजाम?

यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तो यहां पहली बार ट्रांसजेंडर की टीम झांकी की प्रस्तुति करेगी तो वहीं सीएम और राज्यपाल भी यहां मजूद रहेंगे। साथ ही मेले में किसी भी तरह की असमाजिक गतिविधि के लिए पूरी नजर बनाई गई है।

मैदान की व्यवस्था

रावण वध कार्यक्रम के उपलक्ष में जिलाधिकारी रवि ने पहले ही मैदान का परीक्षण किया था। उन्होंने मैदान की घास कटवाने, गड्ढे भरने, उबर खाबर जमीन को समतल करने के साथ-साथ यह भी आदेश दिया है कि शिवरों का ढक्कन भी लगाया जाए तथा रावण वध के दिन बिजली की पूरी आपूर्ति हो।

पटना के रावण की विशेषता

पटना गांधी मैदान में रावण जलाने की प्रथा 1955 में प्रारंभ हुई थी। उसके बाद यदि 3 सालों को छोड़ दिया जाए तो हर वर्ष गांधी मैदान में रावणवध का आयोजन किया जाता है। साल 1965 का चाइना युद्ध 1971 का कारगिल युद्ध और 1975 में पटना में आए बाढ़ के कारण रावणवध का कार्यक्रम नहीं किया गया था। कमल नोपनी का कहना है कि जब 1955 में कार्यक्रम प्रारंभ हुआ था, तो रावण दहन में 500 रुपये तक का खर्च होता था। परंतु यह लागत बढ़ते बढ़ते 25 लाख तक पहुंच चुकी है। पटना के गांधी मैदान में 70 फीट के रावण के साथ साथ 65 फ़ीट का कुंभकरण तथा 60 फीट के मेघनाथ का भी पुतला बनाया गया हैं। पुतलो में 400 पटाखे भरे गए हैं।

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