अमृतसर हादसे में शासन की लापरवाही का शिकार बने हैं लोग?

जूली कुमारी, नई दिल्ली ।। दशहरे के त्यौहार पर पंजाब के अमृतसर में हुए दर्दनाक रेल हादसे में करीब 50 से लोगों की जान चली गई जबकी दर्जनों लोग बुरी तरह घायल हो गए। घटनास्थल का दृष्य इस समय बेहद भयावह व दर्दनाक है। हमेशा ऐसा देखा जाता है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है चाहे वो रेल हादसा हो या पुल हादसा। इस बार भी यही हुआ। लापरवाही प्रशासन ने की और भुगतना आम लोगों को पड़ा।

बताया जा रहा है कि जहां हादसा हुआ वहां रामलीला मनाने की कोई इजाजत नहीं ली गई थी। अगर वाकई में ऐसा है तो पिछले दस दिनों से प्रशासन ने अपनी आंखो पर काली पट्टी क्यों बांध रखी थी। क्यों रावण जलाने की तैयारी देखते हुए भी प्रशासन ने इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी। मुद्दा ये नहीं था कि रामलीला को बिना अनुमति के मनाया जा रहा था, मुद्दा ये था कि आखिर रेलवे ट्रैक के इतना करीब क्यों मनाया जा रहा था। हर बार प्रशासन के इस तरह आंखे मूदने से लाखो घरों और परिवारों की खुशियां छिन जाती हैं। अब सरकार मरने वालों के परिवार को पांच लाख की सहायता राशि की बात तर ही है, लेकिन क्या इस मुआवजे से वो इस तरह के दर्द से बाहर निकल पाएंगे?

सूत्रों के मुताबिक रावण दहन वालें स्थान पर हाजरों की संख्या में लोग मौजूद थे। और इस कदर भीड़ को देखते हुऐ भी रेलवे का फाटक खुला था और हरी झंडी लहराई जा रही थी। चश्मदीदों का कहना है कि इस बीच तेज रफ्तार ट्रेन आई और अनगिनत लोगों को रौंदती हुई चली गई। उनका कहना है कि इस तरह का दर्दनाक मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। मिली जानकारी के अनुसार यह भी बताया जा रहा है कि रावण दहन पर पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू भी मौजूद थीं। वहां मौजूद लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद मौके से नवजोत कौर तुरंत फरार हो गईं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस तरह का कार्यक्रम यहां पर हर वर्ष मनाया जाता है, लेकिन पहले कभी ऐसा देखने को नहीं मिली। अब नवजोत कौर के बयान से तो ऐसा लगता है जैसे वो इस तरह की घटना के इंतजार में थी, तभी तो पहले से कोई सावधानी नहीं बरती गई।

दशहरा जैसे पर्व पर रेलवे या स्थानीय प्रशासन को रेलवे ट्रैक के आस-पास सावधानी बरतनी चाहिए थी। इसके साथ हीं रावण का पुतला दहन रेलवे ट्रैक से काफी दूरी पर होना चाहिए था। लेकिन स्थानीय प्रशासन ने किसी भी तरह की सावधानी बरतनी जरुरी नहीं समझी। जिसका परिणाम इस रेल हादसे द्वारा देखा जा सकता है। वहां मौजूद लोगों का आरोप है कि मौके पर मौजूद सुरक्षा तंत्र की अनदेखी के कारण इस हादसे को अंजाम मिला।

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