क्या सरकार शीतकालीन सत्र में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है?

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली ।। संसद का शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से शुरु हो रहा है। इस बीच सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार इस सत्र में कुछ बड़ा कर सकती है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी करके कहा है कि 10 दिसंबर से जब तक सत्र रहेगा तब तक कोई भी सांसद दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा। साथ ही ये भी कहा कि सांसदों के जो भी जरूरी काम हैं वो संसद सत्र से पहले या बाद में रखें।

अब ऐसे में ये माना जा रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस तरह की हलचल ये इशारा करती है कि शायद बीजेपी राम मंदिर को लेकर कोई अहम कदम उठा सकती है। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और राम मंदिर के निर्माण की मांग तेज होने लगी है। साल 2014 में राम मंदिर के मुद्दे को ही बड़ा मुद्दा बना कर बीजेपी सत्ता में आई थी। लेकिन सरकार ने सत्ता में आने के बाद राम मंदिर के मुद्दे को पीछे छोड़ जगहों के नाम बदलने की राजनीति तेज कर दी।

याद हो संघ के कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी सरकार को सीधे तौर पर राम मंदिर बनाने के लिए कहा था। भागवत ने कहा था कि सरकार को राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून लाना चाहिए। अब ऐसे में शीतकालीन सत्र में ही सरकार अध्यादाश लाकर राम मंदिर के मुद्दे पर कोई कदम उठा सकती है। साथ ही व्हिप जारी होने की बात ने इस बात की तरफ साफ इशारा कर दिया है कि सरकार सत्र में कोई बड़ा कदम उठा सकती है।

क्या होता है व्हिप?

सवाल उठता है कि व्हिप क्या होता है? क्योंकि आज भी काफी लोग हैं जो व्हिप के बारे में नहीं जानते। हम आपको बताते हैं कि व्हिप क्या होती है। दरअसल व्हिप एक तरह का आदेश होती है जो राजनीतिकि पार्टियां अपने दलों के सांसदों के लिए जारी करती है। व्हिप का इस्तेमाल कोरम बनाए रखने के लिया जाता है। साथ ही पार्टी व्हिप के जरिए अपने सांसदों से अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करा सकती है। यह एक तरह से लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है क्योंकि इसमें सांसद अपनी इच्छा से कार्य नही कर सकते। आपको बता दें व्हिप तीन तरह की होती है:-

एक पंक्ति की व्हिप।

दो पंक्ति की व्हिप।

तीन पंक्ति की व्हिप।

इन तीनों में से तीन पंक्ति की व्हिप कठोर और महत्वपूर्ण होती है। इसका इस्तेमाल उस वक्ति किया जाता है जब सदन में अविस्वास प्रस्तवा लाया जाता है तथा इसके उल्लंघन पर सदस्य की सदस्यता खत्म हो जाती है।

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