वाराणसी: संकटमोचन मंदिर को मिली बम से उड़ाने की धमकी

न्यूज डेस्क, नई दिल्ली ।। एक तरफ तो भगवान हनुमान पर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। भगवान हनुमान को जाति और नसल में बांटा जा रहा है वहीं दूसरी तरफ वाराणसी से संकटमोचन मंदिर को उड़ाने की खबर सामने आई है। बतया जा रहा है कि वाराणसी स्थित विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गई है। ये धमकी एक चिट्ठी के माध्यम से दी गई है। चिट्ठी में धमकी दी गई है कि ये धमाका 2006 में हुए धमाके से भी बड़ा होगा। धमकी के बाद से ही हड़कंप मच गया है।

मंदिर को उड़ाने की धमकी की खबर मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्रा ने मंगलवार देर रात पुलिस को दी। महंत ने बताया कि सोमवार की रात उन्हें एक चिट्ठी मिली थी, जिसमें मंदिर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। उन्होंने बताया कि चिट्ठी में लिखा था कि ये धमाका 2006 के धमाके से भी बड़ा होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि इस धमकी को हल्के में न लिया जाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु करदी है।

इस मामले में एसएसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है कि उन्होंने जांच शुरु करदी है। साथ ही उन्होंने बताा कि संकटमोचन बनारस का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है जिसके चलते यहां भक्तों की काफी भीड़ रहती है। भक्तों की सुरक्षा और मंदिर की सुरक्षा को देखते हुए यहां सुरक्षा को और बढ़ा दिया गया है। एसएसपी ने ये भी बताया कि धमकी भरा जो लेकर मिला है उस पर नंबर के साथ एक व्यक्ति का नाम भी लिखा हुआ है। पुलिस को शक है कि किसी ने निजी दुश्मनी के चलते इस लेटर को भेजा है और बदला लेने के लिए सामने वाले का नाम और नंबर भी लिखा है। उनका कहना है कि पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है।

संकटमोचन मंदिर में ब्लास्ट की धमकी मामले में एसएसपी का बयान। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने कहा कि धमकी वाले लेटर पर नम्बर सहित एक व्यक्ति का नाम। शुरुआत में यह निजी दुश्मनी के चलते किसी को फंसाने का मामला लग रहा है। संकट मोचन बनारस की एक महत्वपूर्ण जगह है इसलिए हमने सुरक्षा टाइट कर दी है।

बता दें कि मार्च 2006 में भी तीन जगह बम धमाके किए गए थे, जिससे पूरा देश दहल गया था। ये सिलसिलेवार धमाके संकटमोचन मंदिर, कैंट स्टेशन और दशाश्वमेध घाट पर किए गए थे। इन धमाकों में संकटमोचन मंदिर में 7 से ज्यादा और कैंट स्टेशन पर 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से भी ज्यादा लोग इस धमाके में घयाल हुए थे।

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