“भारतीय समाज कार्य परिषद् का गठन” समाजकार्य शिक्षा के भारतीयकरण में एक और ऐतिहासिक मोड

मनीष शर्मा,नई दिल्ली।।समाज कार्य के शिक्षक दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन-“न्यू फ्रंटियर्स इन सोशल वर्क प्रैक्टिस: भारतीय सन्दर्भ, पर्सपेक्टिव्स  एंड  एक्सपेरिएंसेस” में इकट्ठा हुए। 15 और 16 दिसंबर, 2018 को आयोजित राष्ट्रीय सम्मलेन में समाज कार्य अध्ययन और अनुसन्धान विभाग, तुम्कर विश्वविद्यालय, तुमाकुरु, कर्नाटक और सामाजिक कार्य केंद्र,महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय  हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र के संयुक्त प्रयास व भारतीय शिक्षण मंडल, नागपुर, महाराष्ट्र के सहयोग से समाज कार्य शिक्षा के भारतीयकरण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के सहयोगी “भारतीय समाज कार्य परिषद्” का गठन किया जिसमे तुम्कर विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर सिद्देगोड़ा को “भारतीय समाज कार्य परिषद्” के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया।

उन्होंने कहा कि संगठन भारत में सामाजिक कार्य शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन पेशेवर सामाजिक कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने और सामाजिक कार्य बिरादरी के बीच व्यावसायिकता विकसित करने की कोशिश करेगा। भारतीय समाज कार्य परिषद् के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में चुने जाने वाले डॉ बिष्णु मोहन दास ने कहा कि भारत में सामाजिक कार्य शिक्षा के भारतीय कार्यकारिणी के आंदोलन में भारतीय समाज कार्य परिषद् का जन्म एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। डॉ दास ने यह भी कहा कि भारतीय समाज कार्य परिषद् सामाजिक कार्य में पाठ्यक्रम विकास सहित सामाजिक गतिविधियों में सेमिनार कार्यशालाओं के आयोजन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करेगा और यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भारत में सामाजिक कार्य शिक्षा के भारतीयकरण के विभिन्न पहलुओं पर विशेष  प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। इंदौर से प्रोफेसर रंजना सहगल, पंजाब के प्रोफेसर डी पी सिंह, वर्धा के डॉ मिथिलेश कुमार क्रमशः उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के रूप में चुने गए हैं। मिजोरम से प्रोफेसर कनकराज, शांतिनिकेतन से प्रोफेसर पी के घोष, केरल के प्रोफेसर मोहन और पुणे से प्रोफेसर लॉनी “भारतीय समाज कार्य परिषद्” के सदस्य चुने गए हैं।

आपको बता दे की समाज कार्य शिक्षा को युरोपवाद से मुक्त करने और भारतीय पाट्यक्रम को सम्मिलित करने के लिए देशभर में समाज कार्य के विश्वविद्यालयों से मांग उठायी जा रही हैं जिसमे से कुछ विश्वविद्यालयों में इसकी शुरुआत भी हो चुकी हैं। राष्ट्रीय सम्मलेन में “भारतीय समाज कार्य परिषद्” का गठन होना कहीं न कहीं भारतीयकरण के मुद्दे को और तेजी से उठाने की और संकेत करता हैं।

One thought on ““भारतीय समाज कार्य परिषद् का गठन” समाजकार्य शिक्षा के भारतीयकरण में एक और ऐतिहासिक मोड

  • December 20, 2018 at
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    मुझे बहुत अछ्छा लगा। सार्थकता हो।।।। जुडना चाहुगी

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