भारत रत्न नानाजी के जन्मदिवस को समाजकार्य दिवस घोषित करने की मांग

मनीष शर्मा, नई दिल्ली।। भारतीय समाजकार्य परिषद के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली विश्वविद्यालय में समाज कार्य विभाग के डाॅ विष्णुमोहन दास ने भारत रत्न से सम्मानित नानाजी देशमुख के जन्मदिवस, 11 अक्टूूबर को भारतीय समाज कार्य दिवस के रूप मे मनाने की मांग को उठाया है। इससे पहले 11 अक्टूूबर 2018 को सर्वप्रथम समाजकार्य दिवस के रूप मे दिल्ली समेत देशभर के अन्य सेन्ट्रल, स्टेट व डीम्ड विश्वविद्यालयों जिनमें महात्मा गाँधी हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, इंदौर स्कूल आफ सोशल वर्क, टूमकूर विश्वविद्यालय, कर्नाटक, असम सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी, उदयपुर स्कूल आफ सोशल वर्क, महात्मा गाँधी सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी बिहार, गुजरात, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला, दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में मनाया गया था। लेकिन हाल ही में नानाजी देशमुख को उनके समाजकार्य में योगदान के लिये “भारत-रत्न” से केन्द्र सरकार द्वारा सम्मानित किये जाने पर समाजकार्य दिवस कि माँग को जोर शोर से उठाया जा रहा है।

इन्होने समाज कार्य के वर्तमान में अमेरिका और यूरोप से आयातित पाठ्यक्रम के स्थान पर भारतीय विश्वविद्यालयो के शिक्षकों द्वारा बनाये गये पाठ्यक्रम को लागू करने, विश्वविद्यालयों में नानाजी देशमुख चेयर प्रोफेसर का पद स्थापित करने और समाज कार्य विभागों में भारत-रत्न नानाजी देशमुख शोध केन्द्र स्थापित करने की माँग भी की है। डाॅ विष्णुमोहन दास बताते है कि देशभर से शिक्षकों समेत छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय से इस विषय में पत्राचार के माध्यम से लगातार संवाद चल रहा है।

समाजकार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष (जो कि टुमकूर विश्वविद्यालय के कुलपति भी है) एस वाई सिद्धेगौडा ने नानाजी देशमुख को भारत रत्न से सम्मानित किये जाने पर बहुत खुशी जताई। नानाजी का योगदान ग्रामीण क्षेत्रो मे काफी रहा और भारत-रत्न मिलने से देशभर में उनकी चर्चा होना कही न कही समाजकार्य दिवस को आधिकारिक घोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कनकराज ने भी समाज कार्य दिवस का भरपूर समर्थन किया। और बताया कि भारत समाज कार्य और संस्कृति का धनी है फिर भी दुर्भाग्य है कि सन् 1936 में टाटा इंस्टिट्यूट की स्थापना के बाद भी हम अभी तक पश्चिमी देशों के समाजकार्य की विधियों को अपने विश्वविद्यालयों मे पढा़ रहे हैं।

प्रोफेसर धर्मपाल जो कि पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के समाज कार्य विभाग में बतौर विभागाध्यक्ष है, ने भी नानाजी को भारत-रत्न देने के फैसले का स्वागत किया है और उनके जन्मदिवस को भारतीय समाज कार्य दिवस के रूप में घोषित करने का समर्थन करते हुये कहा कि समाज कार्य पाठ्यक्रम का भारतीयकरण करना या समाज कार्य दिवस की घोषणा की माँग करना केवल भारतीय संस्कृति व भारतीय समाज कार्य और समाज सुधारको के योगदान को पहचान दिलाना है। वही इंदौर स्कूल आफ सोशल वर्क की सीनियर प्रोफेसर रंजना सहगल ने इसके समर्थन मे कहा कि नानाजी देशमुख ने भारत का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय (चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय) की स्थापना की और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की इंटिगरल ह्यूमेनिज्म फिलाॅस्पी पर काम किया है और गरीबी निरोधक व न्यूनतम आवश्यकता के कार्यक्रम चलाया। बहुत प्रसन्नता के साथ भारत रत्न से सम्मानित करने के फैसले का स्वागत करते हुये इस कदम को सराहनीय बताकर कहा कि अब तक राजनीतिक व्यक्तियों को यह सम्मान दिया जाता रहा है समाजकार्य में नानाजी के योगदान पर उनको यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिये था। युवाओं की भागीदारी लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने की प्रेरणा नानाजी से ही मिलती है इससे विश्वविद्यालयों के छात्रों को भी पता चलेगा कि भारत देश में बहुत नायाब हीरे है जिन्होने समाज कार्य में बहुत अच्छा काम किया है।

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